हॉस्पिटल के बेड पर ऑक्सीजन मास्क लगाए शुभांकर मिश्रा की तस्वीर ने सोशल मीडिया की चमक-दमक के पीछे छिपी एक बेहद महत्वपूर्ण सच्चाई की ओर ध्यान खींचा है। आज आपके लाखों फॉलोअर्स हो सकते हैं। आपकी पोस्ट पर लाखों व्यूज़ आ सकते हैं और हजारों लोग आपकी बात पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं। धीरे-धीरे यही लोकप्रियता इंसान को यह विश्वास दिलाने लगती है कि वह लोगों की जिंदगी में हमेशा महत्वपूर्ण रहेगा।
लेकिन वास्तविकता इससे अलग है।
सोशल मीडिया की दुनिया में लोकप्रियता स्थायी नहीं होती।
एक दौर में प्रणय रॉय भारतीय टेलीविजन न्यूज़ का एक बड़ा और प्रभावशाली नाम थे। न्यूज़ देखने वाली उस पीढ़ी के लिए उनका चेहरा और उनकी आवाज़ बेहद परिचित थी। लेकिन समय बदला, मीडिया बदला और दर्शकों की नई पीढ़ी आई। आज बहुत से युवा शायद उन्हें उसी तरह नहीं जानते, जैसे एक समय पूरा देश जानता था।
इसका अर्थ यह नहीं कि प्रणय रॉय का योगदान कम हो गया।
इसका अर्थ सिर्फ इतना है कि समय किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं रुकता।
यही सोशल मीडिया का भी सच है।
आपके फॉलोअर्स आपके साथ तब तक हैं, जब तक आपका कंटेंट उन्हें आकर्षित करता है, जानकारी देता है या कुछ सोचने के लिए मजबूर करता है। आपकी लोकप्रियता आपके कंटेंट से जुड़ी है, केवल आपके नाम से नहीं।
आज आप ट्रेंड कर रहे हैं, कल कोई और करेगा।
आज आपके वीडियो पर करोड़ों व्यूज़ हैं, कल किसी दूसरे चेहरे की पोस्ट लोगों का ध्यान खींच सकती है।
इसलिए फॉलोअर्स की संख्या पर गर्व करना गलत नहीं है, लेकिन उसे स्थायी पहचान समझ लेना निश्चित रूप से गलत है।
एक पत्रकार और मीडिया से जुड़े व्यक्ति के रूप में मुझे लगता है कि असल सफलता इस बात में नहीं है कि कितने लोगों ने आपको देखा, बल्कि इस बात में है कि आपको देखने के बाद कितने लोगों ने कुछ नया सोचा।
क्योंकि खबरें पुरानी हो जाती हैं, ट्रेंड बदल जाते हैं और चेहरे भी बदल जाते हैं।
लेकिन एक अच्छी सोच, एक सही बात और समाज के लिए किया गया सार्थक काम लंबे समय तक याद रहता है।
सोशल मीडिया आपको प्रसिद्ध बना सकता है,
लेकिन आपको याद रखने का फैसला समय करता है।
— हितेन्द्र चौधरी
चीफ एडिटर, D6 न्यूज़
