गोरखपुर: करोड़पति और अरबपति बनने का सपना दिखाकर लोगों से कथित तौर पर करोड़ों रुपये की ठगी करने के आरोपों में घिरी गरिमा सिंह एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मामला गोरखपुर के एक पशु चिकित्सा अधिकारी की मौत से जुड़ा है। आरोप है कि गरिमा सिंह और उसके साथियों के कथित जाल में फंसने के बाद डॉक्टर भारी आर्थिक और मानसिक दबाव में आ गए थे।
गोरखपुर के गोरखनाथ क्षेत्र की राजेंद्र नगर कॉलोनी स्थित बसंत इंक्लेव में रहने वाले पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ। परमात्मा सिंह (52) ने अपार्टमेंट की आठवीं मंजिल से छलांग लगा दी। घटना से पहले उनके छत की ओर जाते हुए और घटना के बाद के दृश्य सीसीटीवी कैमरों में कैद हुए हैं। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
मामले में सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि डॉक्टर ने अपनी मौत के लिए गरिमा सिंह को जिम्मेदार ठहराया है। पुलिस को उनकी जेब से एक पेज का कथित सुसाइड नोट भी मिला है। हालांकि, सुसाइड नोट में लिखी बातों की कानूनी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
होम लोन खत्म करने के नाम पर बना लिया कर्ज का जाल
पुलिस के अनुसार, डॉ। परमात्मा सिंह पहले से होम लोन चुका रहे थे। आरोप है कि गरिमा सिंह ने उन्हें भरोसा दिलाया कि एक नया पर्सनल लोन लेकर उनका पुराना होम लोन खत्म कराया जा सकता है। साथ ही यह भी कथित तौर पर कहा गया कि नए लोन की किस्तें डॉक्टर को खुद नहीं चुकानी पड़ेंगी।
बताया जा रहा है कि डॉक्टर भरोसे में आ गए और उन्होंने अपने जरूरी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए। इसके बाद महज दो दिनों के भीतर अलग-अलग बैंकों से उनके नाम पर करीब 1।40 करोड़ रुपये का लोन करा लिया गया।
आरोप है कि लोन की रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की गई। शुरुआत में डॉक्टर को यह महसूस नहीं होने दिया गया कि उनके नाम पर कितना बड़ा कर्ज खड़ा हो चुका है।
छह बैंकों से दो दिन में करीब 1।40 करोड़ रुपये का लोन
मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, डॉक्टर के दस्तावेज हासिल करने के बाद कथित तौर पर छह अलग-अलग बैंकों से करीब 1।40 करोड़ रुपये का लोन कराया गया।
सबसे बड़ी परेशानी तब सामने आई जब इन कर्जों की मासिक किस्तें डॉक्टर की आय से कई गुना अधिक हो गईं। बताया जा रहा है कि डॉक्टर की मासिक सैलरी करीब सवा लाख रुपये थी, जबकि अलग-अलग लोन की कुल EMI करीब 3 लाख रुपये प्रतिमाह तक पहुंच गई।
यानी करीब 1।25 लाख रुपये की मासिक आय के मुकाबले लगभग 3 लाख रुपये की EMI का बोझ डॉक्टर पर आ गया। इसके बाद बैंक की ओर से रिकवरी का दबाव भी बढ़ने लगा।
पहले कुछ समय तक भरी गईं किस्तें, फिर सामने आया कर्ज का पहाड़
पुलिस जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि शुरुआत में दो से तीन महीने तक लोन की किस्तों का भुगतान किया गया। इससे डॉक्टर को भरोसा बना रहा कि जिस व्यवस्था के बारे में उन्हें बताया गया था, वह सही तरीके से चल रही है।
बताया जा रहा है कि डॉक्टर के खाते में करीब 10 लाख रुपये भी छोड़े गए थे। कथित तौर पर इसे प्रॉफिट बताया गया। शुरुआत में सब कुछ सामान्य दिखाई दिया, लेकिन बाद में जब किस्तों का भुगतान प्रभावित हुआ और बैंकों की ओर से रिकवरी का दबाव बढ़ने लगा तो डॉक्टर के सामने भारी कर्ज की वास्तविक स्थिति सामने आई।
5 अगस्त को डॉक्टर ने दर्ज कराई थी शिकायत
पुलिस के मुताबिक, डॉ। परमात्मा सिंह ने 5 अगस्त को एम्स थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में गरिमा सिंह के अलावा मोहन सिंह, विशाल यादव, साधना मल्ल, श्रुति सिंह तथा संबंधित बैंकों के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराया गया था।
पुलिस पहले ही गरिमा सिंह और उसके पिता ध्रुव नारायण सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। ध्रुव नारायण सिंह गोरखपुर के सहजनवा रेलवे स्टेशन पर स्टेशन अधीक्षक रह चुके हैं।
एक दर्जन से अधिक लोगों को ठगी का आरोप
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गरिमा सिंह पर सिर्फ डॉ। परमात्मा सिंह को ही कथित तौर पर अपने जाल में फंसाने का आरोप नहीं है। पुलिस को शक है कि कई अन्य लोगों को भी बड़े मुनाफे और करोड़पति बनने का सपना दिखाकर आर्थिक जाल में फंसाया गया।
आरोप है कि इस कथित नेटवर्क में लोगों से दस्तावेज हासिल किए जाते थे और फिर उनके नाम पर आर्थिक लेनदेन या लोन कराया जाता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और कितने लोगों के नाम पर कितनी रकम का लोन कराया गया।
जेब से मिला एक पेज का कथित सुसाइड नोट
डॉ। परमात्मा सिंह की मौत के बाद पुलिस को उनकी जेब से एक पेज का कथित सुसाइड नोट मिला। पुलिस के अनुसार, इसमें डॉक्टर ने अपनी मौत के लिए गरिमा सिंह को जिम्मेदार बताया है।
सुसाइड नोट मिलने के बाद पुलिस ने मामले को और गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दी है। पुलिस अब लोन से जुड़े दस्तावेज, बैंक खातों, मोबाइल फोन, कॉल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर सकती है।
जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि डॉक्टर के नाम पर इतने बड़े लोन किस प्रक्रिया से स्वीकृत हुए, रकम किन खातों में पहुंची और पूरी प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका थी।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
डॉ। परमात्मा सिंह के परिवार में उनकी पत्नी सावित्री सिंह और दो बच्चे हैं। उनकी पत्नी भी पशु चिकित्सक हैं। परिवार राजेंद्र नगर स्थित बसंत इंक्लेव में रहता था।
एक तरफ परिवार के सामने अपने सदस्य को खोने का गहरा सदमा है, वहीं दूसरी तरफ डॉक्टर के नाम पर लिए गए कथित भारी कर्ज और उससे जुड़े कानूनी सवाल भी खड़े हो गए हैं।
अब पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस
गरिमा सिंह की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल इस कथित नेटवर्क की पूरी सच्चाई सामने लाना है।
जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि डॉक्टर के दस्तावेज किस तरह हासिल किए गए, छह बैंकों से दो दिन के भीतर करीब 1।40 करोड़ रुपये का लोन कैसे स्वीकृत हुआ, लोन की रकम किन खातों में ट्रांसफर हुई और शुरुआती महीनों में EMI का भुगतान किसने किया।
पुलिस अब बैंकिंग रिकॉर्ड, लोन दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस कथित ठगी में कौन-कौन लोग शामिल थे और डॉक्टर के नाम पर लिए गए कर्ज की पूरी रकम आखिर कहां गई।
नोट: इस खबर में लगाए गए आरोप पुलिस जांच और उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में साक्ष्यों और जांच के आधार पर होगी।
