नई फसल मंडी में पहुंची, लेकिन पुराना स्टॉक नहीं हुआ खाली; पंजाब में राइस मिलर्स के सामने बड़ा संकट

नई फसल दरवाजे पर है और पुराना स्टॉक रास्ता रोककर खड़ा है। पंजाब में धान की सरकारी खरीद शुरू होने से पहले राइस मिलिंग सेक्टर पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। मंडियों में नए धान की आवक शुरू हो चुकी है, लेकिन बड़ी संख्या में राइस मिलों में पिछली फसल का धान अब भी पड़ा है। ऊपर से पुराने चावल की CMR डिलीवरी भी पूरी नहीं हो पाई है।

ऐसे में 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली सरकारी खरीद के साथ पंजाब के सामने सबसे बड़ी चुनौती नई फसल खरीदने की नहीं, बल्कि उसके लिए पर्याप्त मिलिंग और भंडारण क्षमता जुटाने की हो सकती है।


80 फीसदी राइस मिलों में पुराना स्टॉक

पंजाब में करीब 5,200 राइस मिलें हैं। मिलिंग कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक इनमें लगभग 80 फीसदी मिलों में पिछली फसल का धान अभी भी मौजूद है। 

इसके अलावा करीब 10 लाख मीट्रिक टन पुराने चावल की CMR डिलीवरी लंबित बताई जा रही है। इसका सीधा असर मिलों की खाली जगह और स्टोरेज क्षमता पर पड़ रहा है।

सरकारी गोदामों में पहले से मौजूद भारी स्टॉक के कारण पुराने चावल की निकासी भी अपेक्षित गति से नहीं हो रही है। अगर आने वाले हफ्तों में यह स्थिति नहीं बदली तो नई फसल की खरीद शुरू होने के बाद दबाव और बढ़ सकता है।


सरकार ने बढ़ाई CMR की डेडलाइन

पुराने स्टॉक को लेकर राहत की बात यह है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 के कस्टम मिल्ड राइस (CMR) की डिलीवरी की समयसीमा बढ़ाकर 30 नवंबर 2026 कर दी है।

इससे मिलर्स को पुराने चावल की डिलीवरी के लिए अतिरिक्त समय जरूर मिला है। लेकिन दूसरी तरफ नई फसल की सरकारी खरीद 1 अक्टूबर से शुरू होने जा रही है। यानी मिलर्स को एक ही समय में पुराने स्टॉक की निकासी और नई फसल के लिए जगह बनाने, दोनों मोर्चों पर काम करना होगा।


असली दबाव अक्टूबर-नवंबर में दिखेगा

पंजाब में आमतौर पर धान की करीब 70-80 फीसदी मिलिंग मार्च तक पूरी हो जाती है और बाकी मिलिंग जून तक चलती है। लेकिन पिछले दो सीजन में सितंबर तक मिलिंग की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रहने की बात सामने आई है।

अब स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अक्टूबर और नवंबर में सरकारी खरीद तेज होगी। दूसरी ओर नई फसल की बड़े स्तर पर मिलिंग दिसंबर से रफ्तार पकड़ती है।

यानी अगर अक्टूबर तक पुराने धान और चावल का पर्याप्त स्टॉक बाहर नहीं निकला, तो नई खरीद के साथ मिलों और गोदामों में जगह का संकट गहरा सकता है।


बाहरी बाजार पर भी टिकी नजर

पुराने चावल की निकासी के लिए पंजाब के बाहर की मांग भी महत्वपूर्ण हो गई है।

पंजाब से जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में चावल की सप्लाई होती है। हालांकि इन राज्यों में स्थानीय स्तर पर खरीद बढ़ने से पंजाब से जाने वाली मात्रा प्रभावित हुई है।

ऐसे में अगर आने वाले समय में अंतरराज्यीय मांग या निर्यात में तेजी आती है, तो पुराने स्टॉक को निकालने में मदद मिल सकती है।


लंबे समय तक स्टॉक रखने का जोखिम

धान को लंबे समय तक स्टोर करने पर नमी और वजन में कमी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इससे मिलर्स की लागत बढ़ने के साथ स्टॉक से जुड़े जोखिम भी बढ़ते हैं।


यही वजह है कि मिलिंग कारोबारी अब नई फसल की आवक से पहले पुराने स्टॉक को तेजी से निकालने पर नजर बनाए हुए हैं।


धान के भाव पर भी असर संभव

1 अक्टूबर से सरकारी खरीद शुरू होने के बाद पंजाब की मंडियों में नई फसल की आवक तेजी पकड़ सकती है। अगर उस समय तक मिलों में पुराना स्टॉक पर्याप्त मात्रा में खाली नहीं हुआ, तो सामान्य गुणवत्ता वाले धान की खरीद पर दबाव बन सकता है।

इस स्थिति में औसत गुणवत्ता वाले धान के भाव पर दबाव आने की संभावना रहेगी, जबकि बेहतर क्वालिटी के धान की मांग अपेक्षाकृत मजबूत रह सकती है।

हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। अगर सितंबर और अक्टूबर के दौरान CMR डिलीवरी तेज हो जाती है, पुराने चावल की सरकारी निकासी बढ़ती है और मिलों में जगह बनती है, तो नई फसल के समय स्टोरेज का दबाव काफी कम हो सकता है।


अब सितंबर-अक्टूबर सबसे अहम

पंजाब के धान बाजार में फिलहाल नजर सिर्फ मंडियों में आने वाली नई फसल पर नहीं, बल्कि पुराने स्टॉक की निकासी की रफ्तार पर है।

करीब 80 फीसदी मिलों में पुराने स्टॉक की मौजूदगी, लगभग 10 लाख मीट्रिक टन लंबित CMR और सरकारी गोदामों में पहले से मौजूद भारी स्टॉक—ये तीनों फैक्टर आने वाले सीजन की तस्वीर तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

CMR डिलीवरी की डेडलाइन 30 नवंबर तक बढ़ना मिलर्स के लिए राहत जरूर है, लेकिन सितंबर और अक्टूबर में पुराना स्टॉक कितनी तेजी से निकलता है, यही सबसे बड़ा सवाल है।

क्योंकि अक्टूबर में नई फसल मंडियों में होगी और दिसंबर से उसकी मिलिंग का दबाव बढ़ेगा। ऐसे में पंजाब के राइस मिलिंग सेक्टर के लिए आने वाले कुछ सप्ताह यह तय कर सकते हैं कि नया सीजन सामान्य तरीके से चलेगा या स्टॉक और स्टोरेज की चुनौती बाजार पर भारी पड़ेगी।