माँ है जीवन आधार,
तू है जग संबल सार |
तुझे कैसे मै दू बिसार,
तू ही तो मेरा संसार ||
तुम बिन ना अस्तित्व हमारा,
तुम से ही है ये जग सारा |
तुम मेरे जीवन का उजियारा,
मैंने सब कुछ है तुझ पर वारा ||
तुम सा क़ोई नहीं है प्यारा,
मात- पुत्र रिश्ता है न्यारा |
जग चाहे कर ले किनारा,
साथ सदा रहे मेरा तुम्हारा ||
माँ का साथ ना छोड़ क़भी तू ,
ये प्रण कर ले, बस अभी तू |
माँ का जो आशीष रहेगा,
ये जीवन होगा सफल तभी तू ||
झूठी है ये दुनिया सारी,
सब छूटे यहाँ बारी -बारी |
हर पल तू साथ रही है मेरे,
मै सदा तेरी हूँ आभारी ||
कैसे क़र्ज़ चुकाऊँ तेरा,
जीवन का तू मेरे सवेरा |
जिस नें भी है माँ से मुख मोडा,
उसने खोया ये जीवन कोरा ||
जीवन है निज अधूरा,
बिन माँ के आशीष |
माँ की कर सेवा तू,
नवा कर माँ को शीष ||
डॉ पारुल राज
स्वरचित मौलिक
