ईरान संकट से भारत का बासमती निर्यात प्रभावित, 4 लाख टन चावल अटका



ईरान से जुड़े युद्ध और मिडिल-ईस्ट में बढ़े तनाव के कारण भारत के बासमती चावल के निर्यात पर बड़ा असर पड़ा है। भारतीय चावल निर्यातकों ने सरकार से कोविड-19 जैसे राहत पैकेज देने की मांग की है। 


क्या हुआ है ?

मिडिल-ईस्ट में युद्ध और अस्थिरता के कारण शिपिंग रूट प्रभावित हो गए हैं।

जहाजों की आवाजाही रद्द या देर से हो रही है और कंटेनरों की कमी हो गई है।

खाड़ी देशों की तरफ जाने वाले माल पर बीमा और युद्ध-जोखिम शुल्क बढ़ गया है। 


कितना असर पड़ा

अंतरराष्ट्रीय फ्रेट (shipping) लागत 15–20% तक बढ़ गई है। 

लगभग 4 लाख टन बासमती चावल बंदरगाहों पर या रास्ते में फंसा हुआ है। 

पिछले 3 दिनों में भारत में बासमती के दाम 7–10% तक गिर गए हैं। 


भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण

भारत के कुल बासमती निर्यात का 60–70% हिस्सा खाड़ी देशों में जाता है।

अकेला ईरान ही लगभग 15–20% बासमती खरीदता है। 

निर्यातकों की सरकार से मांग

भारतीय चावल निर्यातक संगठन ने सरकार से ये राहत मांगी है:

बंदरगाह शुल्क (Storage Demurrage) में छूट।

जहाज रद्द होने पर माल को दूसरे देश या बंदरगाह भेजने की अनुमति।

इस स्थिति को “फोर्स मेज्योर” (आपात परिस्थिति) घोषित किया जाए ताकि कंपनियों पर जुर्माना न लगे।

कोविड-19 के समय की तरह बैंक लोन और वर्किंग कैपिटल में राहत।


ईरान-मिडिल ईस्ट के युद्ध के कारण जहाजों का रास्ता और लागत बढ़ गई है, जिससे भारत का बासमती निर्यात रुक रहा है। इसलिए निर्यातक सरकार से कोरोना समय जैसी आर्थिक राहत मांग रहे हैं।