देश में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक बड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने साधना ग्रुप के चेयरमैन राकेश कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में कथित अपराध से अर्जित रकम करीब 168 करोड़ रुपये है। आरोपों में क्रिप्टोकरेंसी और हवाला के जरिए नकदी का लेनदेन तथा दिवाला प्रक्रिया (Insolvency Process) में कथित अनियमितताएं शामिल हैं। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत द्वारा किया जाना बाकी है।
शुक्रवार देर रात दिल्ली से हुई गिरफ्तारी
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ED ने राकेश कुमार गुप्ता को शुक्रवार, 9 अक्टूबर की रात करीब 10:25 बजे दिल्ली में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत हिरासत में लिया। शनिवार तड़के उन्हें अदालत के समक्ष पेश किया गया।
अदालत ने जांच एजेंसी को पूछताछ के लिए पांच दिन की हिरासत दी है। ED ने सात दिन की हिरासत मांगी थी। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में पैसों के लेनदेन की पूरी कड़ी का पता लगाने के लिए पूछताछ जरूरी है।
क्या है ₹168 करोड़ का पूरा मामला?
यह मामला दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा सितंबर 2026 में दर्ज की गई प्राथमिकी (FIR) से जुड़ा है। शिकायत में साधना मीडिया प्राइवेट लिमिटेड (SMPL) की दिवाला प्रक्रिया और उससे संबंधित वित्तीय लेनदेन में कथित गड़बड़ियों के आरोप लगाए गए हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में यह आरोप भी है कि कंपनी की दिवाला प्रक्रिया को इस तरह प्रभावित किया गया कि आयकर विभाग की लगभग 110.10 करोड़ रुपये की बकाया देनदारी का निपटारा केवल 20 लाख रुपये में हो गया।
शिकायत के मुताबिक, इस प्रक्रिया में कंपनी से जुड़े लेनदारों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। आरोप है कि संबंधित लेनदारों के पास कंपनी की लेनदार समिति (Committee of Creditors—CoC) में 99.41 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।
ED यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दिवाला प्रक्रिया के दौरान किन लोगों और कंपनियों को आर्थिक लाभ मिला तथा संबंधित वित्तीय निर्णय किस तरह लिए गए।
क्रिप्टोकरेंसी और हवाला के जरिए रकम लेने का आरोप
इस मामले का एक प्रमुख पहलू क्रिप्टोकरेंसी और हवाला के माध्यम से कथित लेनदेन है। जांच से संबंधित पुलिस शिकायत के अनुसार, साधना मीडिया प्राइवेट लिमिटेड और आर्यन टीवी से जुड़े कारोबार के पुनर्विक्रय के संबंध में दो करोड़ रुपये से अधिक की नकदी क्रिप्टोकरेंसी और हवाला के माध्यम से प्राप्त किए जाने का आरोप है।
हवाला अनौपचारिक माध्यम से धन के हस्तांतरण की एक व्यवस्था है, जिसका इस्तेमाल कुछ मामलों में बैंकिंग चैनलों से बाहर रकम पहुंचाने के लिए किया जाता है।
ED की जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित रकम कहां से आई, किन माध्यमों से स्थानांतरित हुई और आखिरकार उसका लाभ किन व्यक्तियों या कंपनियों को मिला। इन आरोपों की जांच जारी है।
अपनी ही कंपनी को भुगतान का भी आरोप
मामले में एक अन्य आरोप संबंधित कंपनियों को भुगतान किए जाने से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, साधना मीडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से जुड़े हुए लेनदारों को कुल 4.48 करोड़ रुपये के भुगतान किए जाने का आरोप है।
इसमें शार्पलाइन ब्रॉडकास्ट नामक कंपनी को 2.99 करोड़ रुपये दिए जाने की बात भी सामने आई है। जांच एजेंसी इन भुगतानों की प्रकृति, उद्देश्य और लाभार्थियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
शेयरों में कथित हेरफेर का मामला भी जांच के दायरे में
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने मई 2025 में साधना ब्रॉडकास्ट के शेयरों में कथित हेरफेर से संबंधित आदेश जारी किया था। रिपोर्टों में इस मामले में करीब 58 करोड़ रुपये की देनदारी से जुड़ी कार्रवाई का भी उल्लेख है।
ED की जांच में इस पुराने मामले और वर्तमान वित्तीय लेनदेन के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल की जा रही है। हालांकि, अलग-अलग नियामकीय और आपराधिक कार्यवाहियों को एक ही निष्कर्ष मानना उचित नहीं होगा।
बचाव पक्ष ने क्या कहा?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राकेश कुमार गुप्ता के बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि SEBI और आयकर विभाग की ओर से उनके खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं की गई थी। बचाव पक्ष ने आयकर विभाग से नो-ड्यूज प्रमाणपत्र मिलने और SEBI द्वारा लगाए गए जुर्माने का भुगतान किए जाने का भी उल्लेख किया।
अदालत ने फिलहाल ED की जांच और हिरासत की कार्रवाई को अवैध मानने के तर्कों को स्वीकार नहीं किया। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि कथित धन का प्रवाह बैंकिंग व्यवस्था के बाहर भी हुआ और जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिले डेटा की जांच अभी बाकी है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि हिरासत में भेजा जाना दोष सिद्ध होना नहीं है। मामले में लगाए गए आरोपों और बचाव पक्ष की दलीलों का अंतिम निपटारा न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल जांच एजेंसी का ध्यान कथित 168 करोड़ रुपये के धन प्रवाह का पता लगाने, संबंधित कंपनियों के लेनदेन की जांच करने और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण करने पर है।
आने वाले दिनों में पूछताछ और जांच से मामले में नए तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल राकेश कुमार गुप्ता के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं और अदालत में दोष सिद्ध हो
ने तक उन्हें आरोपी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
