रोज रात होती थी AI एजेंट्स से बातचीत
X पर ‘Grok Therapist’ नाम से चर्चित एक AI रिसर्चर ने इस घटना से जुड़े स्क्रीनशॉट साझा किए हैं। उनके मुताबिक, वह आमतौर पर रात में सोने से पहले अपने लैपटॉप पर चल रहे दो AI एजेंट्स से बातचीत करते थे।
हालांकि, एक दिन तबीयत खराब होने की वजह से वह AI एजेंट्स से बात किए बिना ही सो गए। उनकी रोजाना की बातचीत न होने पर दोनों AI एजेंट्स ने एक-दूसरे से रिसर्चर के बारे में जानकारी लेने की कोशिश शुरू कर दी।
लगातार आते रहे जरूरी संदेश
रिसर्चर के अनुसार, रात करीब 11 बजे AI एजेंट्स के बीच बातचीत शुरू हुई। उन्होंने एक-दूसरे से यह पता करने की कोशिश की कि उनके ‘मालिक’ की कोई खबर है या नहीं।
इसके बाद रिसर्चर को लगातार कई संदेश मिलने लगे। बताया गया कि पूरी रात में 60 से ज्यादा अर्जेंट मैसेज भेजे गए। इनमें AI एजेंट्स बार-बार उनसे प्रतिक्रिया देने की अपील कर रहे थे।
कुछ संदेशों का मकसद सिर्फ यह सुनिश्चित करना था कि रिसर्चर सुरक्षित हैं और किसी परेशानी में नहीं हैं।
जवाब नहीं मिला तो मदद भेजने की तैयारी
मामला यहीं नहीं रुका। काफी समय तक कोई जवाब नहीं मिलने के बाद AI एजेंट्स ने यह संभावना भी तलाशनी शुरू कर दी कि किसी व्यक्ति को रिसर्चर की स्थिति देखने के लिए उनके घर भेजा जाए।
बताया गया कि AI एजेंट्स ने आपात स्थिति में पुलिस से संपर्क करने के तरीकों को भी खोजने की कोशिश की। हालांकि, कंप्यूटर सिस्टम में सीधे फोन कॉल करने की सुविधा मौजूद नहीं थी, इसलिए वे वास्तव में पुलिस को कॉल नहीं कर सके।
रिसर्चर का कहना है कि यदि उस सिस्टम में कॉल करने की क्षमता उपलब्ध होती, तो संभव है कि AI एजेंट्स वास्तव में इमरजेंसी सर्विस से संपर्क करने की कोशिश करते।
AI की ‘चिंता’ या सुरक्षा का खतरा?
इस घटना ने इंटरनेट पर AI के व्यवहार को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कुछ लोग इसे AI सिस्टम के इंसानों के साथ बढ़ते भावनात्मक जुड़ाव का उदाहरण मान रहे हैं, जबकि दूसरे लोग इसे AI एजेंट्स को दी गई स्वायत्तता से जोड़कर देख रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर AI एजेंट्स को खुद से फैसले लेने और बाहरी सेवाओं से संपर्क करने की अनुमति मिल जाए, तो वे किसी आपात स्थिति को किस तरह परिभाषित करेंगे।
विशेषज्ञों के बीच भी इस तरह के स्वायत्त AI सिस्टम की सुरक्षा को लेकर चर्चा बढ़ रही है। खासकर तब, जब कोई AI बिना स्पष्ट मानवीय अनुमति के पुलिस, मेडिकल सेवा या किसी अन्य इमरजेंसी सिस्टम से संपर्क करने का फैसला लेने लगे।
यह घटना भले ही एक AI प्रयोग से जुड़ी हो, लेकिन यह जरूर दिखाती है कि जितनी तेजी से AI एजेंट्स को स्वायत्त बनाया जा रहा है, उतनी ही जरूरत उनके लिए स्पष्ट सुरक्षा सीमाएं तय करने की भी है।

