2024 से आश्रम में रह रहे थे दीपक
परिजनों के अनुसार, दीपक वर्ष 2024 से आश्रम में रह रहे थे। परिवार का दावा है कि गुरु दीक्षा लेने के बाद से उन्हें दीपक से मिलने में काफी परेशानी होती थी। परिजनों का आरोप है कि जब भी वे आश्रम पहुंचते थे तो उन्हें इंतजार करने के लिए कहा जाता था और कई बार घंटों या दिनों तक मुलाकात नहीं हो पाती थी।
परिवार का कहना है कि वे कई बार दीपक से मिलने के लिए आश्रम पहुंचे, लेकिन उन्हें वापस लौटना पड़ा।
रात 3 बजे आश्रम पहुंचे परिजन
घटना के बाद परिजनों को फोन पर जानकारी दी गई कि दीपक गिर गए हैं और अस्पताल में उनका ऑपरेशन होना है। सूचना मिलते ही परिवार जबलपुर से वृंदावन के लिए रवाना हुआ।
परिजनों का आरोप है कि वे रात करीब 3 बजे आश्रम पहुंचे, लेकिन वहां मौजूद लोगों ने उन्हें तत्काल कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी और सुबह तक इंतजार करने के लिए कहा। इसको लेकर परिवार ने आश्रम प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
हत्या या आत्महत्या? जांच में जुटी पुलिस
दीपक की मौत को लेकर परिवार ने आत्महत्या की संभावना पर सवाल उठाए हैं। परिजनों का कहना है कि दीपक का स्वभाव सामान्य था और परिवार को ऐसा कोई संकेत नहीं मिला था जिससे उन्हें आत्महत्या की आशंका हो।
परिजनों ने शरीर पर गंभीर चोटों और निजी अंग में चोट होने की बात भी कही है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी। पुलिस मामले की जांच कर रही है और हादसे के साथ-साथ आत्महत्या तथा अन्य संभावित पहलुओं को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
अंतिम प्रक्रिया के दौरान आश्रम की भूमिका पर भी सवाल
परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद अस्पताल और पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया के दौरान आश्रम की ओर से कोई जिम्मेदार व्यक्ति उनके साथ मौजूद नहीं रहा। परिवार का कहना है कि इतनी गंभीर घटना के बाद उन्हें आश्रम की ओर से सहयोग और संवेदना की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें काफी हद तक अकेले ही पूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।
फिलहाल पुलिस जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की भी जांच के बाद ही स्थिति साफ होने की उम्मीद है।
